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समूह चर्चा (Group Discussion) → अवधारणा, प्रक्रिया और कौशल

Published by: Ravi Kumar
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Introduction

समूह चर्चा (Group Discussion), जिसे संक्षेप में GD कहा जाता है, एक व्यवस्थित (Systematic) और उद्देश्यपूर्ण (Purposeful) मौखिक बातचीत की प्रक्रिया है। इसमें व्यक्तियों का एक छोटा समूह (обычно 8-12 लोग) एक वृत्ताकार या अर्ध-वृत्ताकार व्यवस्था में बैठकर किसी दिए गए विषय (Topic) या समस्या (Problem) पर अपने विचारों, रायों और तर्कों का आदान-प्रदान करता है।

यह केवल ‘बातचीत’ नहीं है। यह एक ऐसी विधि है जिसका उपयोग किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व लक्षणों (Personality Traits), नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills), और सामाजिक व्यवहार (Social Behavior) को परखने के लिए किया जाता है। लिखित परीक्षा केवल आपके ज्ञान (Knowledge) की जाँच करती है, लेकिन GD यह जाँचता है कि आप उस ज्ञान को दूसरों के सामने प्रभावी ढंग से कैसे प्रस्तुत करते हैं और एक टीम में कैसे काम करते हैं।

समूह चर्चा (Group Discussion) → अवधारणा, प्रक्रिया और कौशल

समूह चर्चा के उद्देश्य (Objectives of GD)

कंपनियां और संस्थान GD क्यों आयोजित करते हैं? इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. जन-उन्मूलन (Mass Elimination): जब किसी पद के लिए हजारों आवेदन आते हैं, तो साक्षात्कार (Interview) से पहले भीड़ को कम करने के लिए GD सबसे प्रभावी उपकरण है।
  2. संचार कौशल (Communication Skills): यह परखना कि उम्मीदवार अपनी बात कितनी स्पष्टता (Clarity) और आत्मविश्वास (Confidence) से कह सकता है।
  3. टीम वर्क (Teamwork): उम्मीदवार दूसरों के साथ कैसे व्यवहार करता है? क्या वह दूसरों को सुनता है या केवल अपनी बात थोपता है?
  4. नेतृत्व गुण (Leadership Qualities): क्या उम्मीदवार चर्चा को दिशा (Direction) दे सकता है और संघर्ष (Conflict) को सुलझा सकता है?
  5. ज्ञान और विश्लेषण (Knowledge and Analysis): विषय की गहराई और विश्लेषणात्मक क्षमता (Analytical Ability) की जाँच करना।

समूह चर्चा की विशेषताएं (Characteristics of GD)

एक औपचारिक GD की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • समूह का आकार (Group Size): आमतौर पर 8 से 15 प्रतिभागी।
  • समय सीमा (Time Limit): चर्चा के लिए एक निश्चित समय (जैसे 15-20 मिनट) दिया जाता है।
  • कोई निर्दिष्ट नेता नहीं (No Appointed Leader): GD की शुरुआत में किसी को नेता नहीं बनाया जाता। नेतृत्व अपने आप उभरता है (Emergent Leadership)। जो चर्चा को सही दिशा देता है, वही नेता बन जाता है।
  • विचारों का आदान-प्रदान (Exchange of Ideas): यह बहस (Debate) नहीं है, बल्कि चर्चा है। यहाँ उद्देश्य जीतना नहीं, बल्कि किसी निष्कर्ष (Conclusion) या सहमति (Consensus) तक पहुँचना होता है।

समूह चर्चा और वाद-विवाद में अंतर (Difference between GD and Debate)

अक्सर छात्र GD को डिबेट समझ लेते हैं, जो एक बड़ी गलती है। परीक्षा में यह अंतर स्पष्ट करना आवश्यक है:

आधार (Basis)वाद-विवाद (Debate)समूह चर्चा (GD)
प्रकृतियह प्रतिस्पर्धी (Competitive) होती है।यह सहयोगात्मक (Cooperative) होती है।
पक्ष/विपक्षइसमें आपको या तो पक्ष में बोलना होता है या विपक्ष में।इसमें आप विषय के दोनों पहलुओं पर बात कर सकते हैं।
उद्देश्यअपनी बात को सही साबित करना और जीतना।विचारों का आदान-प्रदान और आम सहमति बनाना।
शैलीयह आक्रामक (Aggressive) हो सकती है।यह मुखर (Assertive) लेकिन विनम्र होनी चाहिए।

मूल्यांकन के मानदंड (Evaluation Criteria)

चयनकर्ता (Selectors) या मॉडरेटर (Moderator) उम्मीदवारों को किन पैमानों पर नंबर देते हैं? इसे ‘K-C-L-G’ फॉर्मूले से समझा जा सकता है:

(A) विषय का ज्ञान (Knowledge of Subject Matter)

  • क्या आपके पास विषय से संबंधित तथ्य (Facts), आंकड़े (Data) और उदाहरण हैं?
  • हवा में बातें करने वाले को कम अंक मिलते हैं, जबकि तर्कों के साथ बोलने वाले को अधिक।

(B) संचार कौशल (Communication Skills)

  • प्रवाह (Fluency): बिना रुके बोलने की क्षमता।
  • उच्चारण (Pronunciation): शब्द साफ होने चाहिए।
  • सुनना (Listening): क्या आप दूसरों को ध्यान से सुन रहे हैं? एक अच्छा वक्ता एक अच्छा श्रोता भी होता है।

(C) नेतृत्व कौशल (Leadership Skills)

  • पहल करना (Initiative): चर्चा की शुरुआत करना एक जोखिम है, लेकिन अगर सही तरीके से की जाए तो इसके ‘बोनस अंक’ मिलते हैं।
  • दिशा देना (Direction): यदि समूह विषय से भटक रहा है, तो उसे वापस ट्रैक पर लाना।

(D) समूह गतिशीलता (Group Dynamics)

  • क्या आप दूसरों को बोलने का मौका दे रहे हैं?
  • क्या आप असहमत होने पर भी विनम्र हैं?
  • शारीरिक भाषा (Body Language): आँखों का संपर्क (Eye Contact) और सकारात्मक हाव-भाव (Gestures)।

समूह चर्चा के प्रकार (Types of GD Topics)

GD में दिए जाने वाले विषयों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  1. तथ्यात्मक विषय (Factual Topics): ये सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। इसमें ज्ञान की आवश्यकता होती है।
    • उदाहरण: “भारतीय अर्थव्यवस्था: 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य”, “नई शिक्षा नीति 2020″।
  2. अमूर्त विषय (Abstract Topics): ये काल्पनिक या रचनात्मक विषय होते हैं जिनका कोई एक सही उत्तर नहीं होता। इसमें आपकी रचनात्मकता (Creativity) देखी जाती है।
    • उदाहरण: “लाल रंग नीला है (Red is Blue)”, “शून्य (Zero)”, “कड़ी मेहनत बनाम स्मार्ट वर्क”।
  3. केस स्टडी (Case Studies): इसमें एक वास्तविक व्यावसायिक समस्या (Business Problem) दी जाती है और समूह को उसका समाधान ढूँढना होता है।
    • उदाहरण: “कंपनी X की बिक्री गिर रही है, आप मार्केटिंग मैनेजर के रूप में क्या करेंगे?”

समूह चर्चा की प्रक्रिया (Process of GD)

GD आमतौर पर तीन चरणों में चलती है:

  1. शुरुआत (Initiation):
    • मॉडरेटर विषय की घोषणा करता है और सोचने के लिए 2-5 मिनट का समय देता है।
    • चर्चा शुरू करने वाले को ‘Initiator’ कहा जाता है। यह “उच्च जोखिम, उच्च लाभ” (High Risk, High Gain) वाली स्थिति है।
    • शुरुआत करने के तरीके: किसी प्रसिद्ध उद्धरण (Quote) से, परिभाषा (Definition) से, प्रश्न (Question) से, या चौंकाने वाले आंकड़ों (Facts) से।
  2. मुख्य चर्चा (The Body of Discussion):
    • यह सबसे लंबा हिस्सा है (10-15 मिनट)।
    • इसमें प्रतिभागी अपने विचार रखते हैं, दूसरों का समर्थन करते हैं या विनम्रता से असहमति जताते हैं।
    • इस दौरान आँख मिलाना (Eye Contact) केवल मॉडरेटर से नहीं, बल्कि पूरे समूह से करना चाहिए।
  3. निष्कर्ष (Conclusion/Summarization):
    • अंत में, मॉडरेटर किसी एक व्यक्ति को चर्चा का सारांश (Summarize) प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है।
    • निष्कर्ष में अपनी निजी राय नहीं, बल्कि पूरे समूह की चर्चा का निचोड़ (Gist) प्रस्तुत करना चाहिए।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

एक सफल GD के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

क्या करें (Do’s)क्या न करें (Don’ts)
स्पष्ट बोलें: धीमी या बहुत तेज आवाज़ न रखें।आक्रामक न हों: चिल्लाना या मेज ठोकना मना है।
तर्क दें: “मुझे लगता है” की जगह “तथ्य यह है कि” का प्रयोग करें।बीच में न काटें: दूसरों की बात पूरी होने दें (Don’t interrupt)।
आँख मिलाएं: बोलते समय सभी ग्रुप मेंबर्स को देखें।केवल मॉडरेटर को न देखें: यह इंटरव्यू नहीं है, चर्चा है।
नोट्स लें: दूसरों के बिंदुओं को नोट करें ताकि आप उन पर बोल सकें।नकारात्मक शारीरिक भाषा: उंगलियां न चटकाएं, पैर न हिलाएं।
दूसरों को शामिल करें: जो चुप हैं, उन्हें बोलने के लिए प्रेरित करें।हावी न हों (Don’t Dominate): दूसरों को बोलने का मौका न देना नकारात्मक है।

निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्षतः, समूह चर्चा (GD) किसी व्यक्ति के ज्ञान और व्यक्तित्व का दर्पण है। यह केवल ‘बोलने की कला’ नहीं है, बल्कि ‘साथ मिलकर सोचने की कला’ है। एक संगठन में कोई भी व्यक्ति अकेले कार्य नहीं करता, उसे टीम के साथ चलना होता है; GD इसी क्षमता का परीक्षण करता है।

स्नातक विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि GD में सफल होने के लिए आक्रामक होने की नहीं, बल्कि मुखर (Assertive) होने की आवश्यकता है। एक अच्छा श्रोता बनना, विषय का व्यापक ज्ञान रखना, और दूसरों का सम्मान करना ही GD में सफलता की कुंजी है।

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Ravi Kumar is a content creator at Sarkari Diary, dedicated to providing clear and helpful study material for B.Ed students across India.

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