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Types of Communication → Classification and Detailed Discussion

Published by: Ravi Kumar
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Introduction

संचार (Communication) एक बहुआयामी प्रक्रिया (Multidimensional Process) है। किसी भी संगठन (Organization) या सामाजिक व्यवस्था में संचार केवल एक ही तरीके से नहीं होता। स्थिति, उद्देश्य, और शामिल व्यक्तियों के आधार पर संचार के अलग-अलग रूप होते हैं।

एक स्नातक विद्यार्थी के लिए संचार के वर्गीकरण (Classification) को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि प्रभावी प्रबंधन (Effective Management) और सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction) के लिए सही समय पर सही प्रकार के संचार का चयन करना होता है। संचार को मुख्य रूप से तीन आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. माध्यम/अभिव्यक्ति के आधार पर (Based on Medium/Expression)
  2. संगठनात्मक संबंधों/औपचारिकता के आधार पर (Based on Organizational Relationships/Formality)
  3. प्रवाह या दिशा के आधार पर (Based on Flow or Direction)

Types of Communication → Classification and Detailed Discussion

माध्यम या अभिव्यक्ति के आधार पर (Based on Medium or Expression)

अभिव्यक्ति के आधार पर संचार को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है: शाब्दिक (Verbal) और अशाब्दिक (Non-Verbal)।

(A) शाब्दिक संचार (Verbal Communication)

जब संदेश का आदान-प्रदान शब्दों (Words) और भाषा (Language) के माध्यम से किया जाता है, तो उसे शाब्दिक संचार कहते हैं। यह संचार का सबसे सामान्य रूप है। इसे पुनः दो भागों में विभाजित किया जाता है:

1. मौखिक संचार (Oral Communication):

इसमें बोलकर संदेश भेजा जाता है। यह आमने-सामने की बातचीत (Face-to-face conversation), टेलीफोन पर बात, भाषण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि हो सकता है।

  • लाभ (Advantages): यह तेज होता है और इसमें तत्काल प्रतिपुष्टि (Immediate Feedback) मिलती है। भ्रम (Confusion) को तुरंत दूर किया जा सकता है।
  • सीमाएं (Limitations): इसका कोई स्थायी रिकॉर्ड (Permanent Record) नहीं होता और कानूनी कार्यवाही में इसका प्रमाण (Proof) देना कठिन होता है।
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2. लिखित संचार (Written Communication):

जब शब्दों को लिखकर या टाइप करके संदेश भेजा जाता है। उदाहरण: ईमेल, रिपोर्ट, पत्र (Letters), मेमो, नोटिस आदि।

  • लाभ (Advantages): यह भविष्य के संदर्भ (Future Reference) के लिए सुरक्षित रहता है। यह जटिल (Complex) और लंबी जानकारी देने के लिए उत्तम है। यह कानूनी रूप से वैध (Legally Valid) है।
  • सीमाएं (Limitations): यह एक धीमी प्रक्रिया है। इसमें तत्काल फीडबैक नहीं मिलता और अनपढ़ लोगों के लिए यह उपयोगी नहीं है।

(B) अशाब्दिक संचार (Non-Verbal Communication)

“क्रिया शब्दों से अधिक जोर से बोलती है” (Actions speak louder than words)। अशाब्दिक संचार में शब्दों का प्रयोग नहीं होता, बल्कि संकेतों (Signs), हाव-भाव (Gestures) और शारीरिक भाषा का प्रयोग होता है। शोध बताते हैं कि हमारे कुल संचार का लगभग 65% से 93% हिस्सा अशाब्दिक होता है। इसके प्रमुख तत्व हैं:

  1. काइनेंसिक्स/शारीरिक भाषा (Kinesics/Body Language): इसमें चेहरे के हाव-भाव (Facial Expressions), आँखों का संपर्क (Eye Contact), बैठने या खड़े होने का तरीका (Posture) शामिल है। जैसे- मुस्कुराना खुशी का संकेत है, जबकि माथे पर शिकन तनाव का।
  2. परा-भाषा (Paralanguage): यह ‘क्या’ कहा गया है से नहीं, बल्कि ‘कैसे’ कहा गया है, इससे संबंधित है। इसमें आवाज़ का उतार-चढ़ाव (Tone), पिच (Pitch), और बोलने की गति (Speed) शामिल है।
  3. प्रोक्सेमिक्स/दूरी (Proxemics): संचार के दौरान दो लोगों के बीच की शारीरिक दूरी (Physical Distance)। उदाहरण के लिए, दोस्तों के बीच कम दूरी होती है (Intimate zone), जबकि बॉस और कर्मचारी के बीच अधिक दूरी (Social zone) होती है।
  4. हैप्टिक्स/स्पर्श (Haptics): स्पर्श के माध्यम से संचार। जैसे- हाथ मिलाना (Handshake) विश्वास का प्रतीक है, या पीठ थपथपाना शाबाशी का।
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औपचारिकता के आधार पर (Based on Formality)

किसी संगठन (Organization) में नियमों और संरचना के आधार पर संचार को दो भागों में बांटा जाता है:

(A) औपचारिक संचार (Formal Communication)

जब संचार आधिकारिक चैनलों (Official Channels) और पहले से निर्धारित नियमों (Pre-determined rules) के माध्यम से होता है, तो उसे औपचारिक संचार कहते हैं।

  • विशेषता: यह पदसोपान (Hierarchy) का पालन करता है। इसमें अधिकार और उत्तरदायित्व (Authority and Responsibility) स्पष्ट होते हैं।
  • उदाहरण: बॉस द्वारा कर्मचारी को दिया गया आदेश, कर्मचारी द्वारा दी गई रिपोर्ट, या कंपनी की नीतियों (Policies) का सर्कुलर।
  • लाभ: यह व्यवस्थित (Systematic) होता है और इसमें जिम्मेदारी तय करना आसान होता है।
  • हानि: प्रक्रिया लंबी होने के कारण इसमें देरी (Delay) होती है और यह थोड़ा कठोर (Rigid) होता है।

(B) अनौपचारिक संचार (Informal Communication)

इसे ‘अंगूरी लता संचार’ (Grapevine Communication) भी कहा जाता है। जब संचार आधिकारिक लाइनों से हटकर व्यक्तिगत या सामाजिक संबंधों (Social Relations) के आधार पर होता है, तो उसे अनौपचारिक संचार कहते हैं।

  • विशेषता: यह किसी नियम या पद (Rank) का पालन नहीं करता। यह गपशप (Gossip) या कैंटीन चर्चा के रूप में होता है।
  • उदाहरण: दो सहकर्मियों (Colleagues) का लंच पर बॉस के व्यवहार या क्रिकेट मैच के बारे में बात करना।
  • लाभ: यह बहुत तेज गति से फैलता है और कर्मचारियों के मनोबल (Morale) और सामाजिक जुड़ाव के लिए अच्छा है।
  • हानि: इसमें अफवाहें (Rumors) और गलत जानकारी फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। इसका कोई स्रोत (Source) पता नहीं चलता।

प्रवाह या दिशा के आधार पर (Based on Direction of Flow)

औपचारिक संगठनों में सूचना किस दिशा में बह रही है, इसके आधार पर संचार के प्रकार निम्नलिखित हैं:

(A) लंबवत संचार (Vertical Communication)

जब संचार अलग-अलग स्तर (Levels) के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच होता है। इसके दो उप-प्रकार हैं:

  1. अधोमुखी संचार (Downward Communication):
    • दिशा: ऊपर से नीचे की ओर (Top to Bottom)।
    • कौन: उच्च अधिकारी (Superiors) से अधीनस्थों (Subordinates) तक।
    • उद्देश्य: आदेश देना, निर्देश (Instructions) देना, नीतियां समझाना।
    • उदाहरण: CEO द्वारा मैनेजर को ईमेल भेजना।
  2. ऊर्ध्वमुखी संचार (Upward Communication):
    • दिशा: नीचे से ऊपर की ओर (Bottom to Top)।
    • कौन: अधीनस्थों से उच्च अधिकारियों तक।
    • उद्देश्य: रिपोर्ट देना, शिकायतें (Grievances) करना, सुझाव (Suggestions) देना, या फीडबैक देना।
    • महत्व: यह प्रबंधन को जमीनी हकीकत (Ground Reality) जानने में मदद करता है।
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(B) समतल या क्षैतिज संचार (Horizontal or Lateral Communication)

जब संचार संगठन के एक ही स्तर (Same Level) के कर्मचारियों या विभागों के बीच होता है।

  • उद्देश्य: समन्वय (Coordination) स्थापित करना और सूचना साझा करना।
  • उदाहरण: मार्केटिंग मैनेजर और प्रोडक्शन मैनेजर के बीच बैठक, या दो सहपाठियों के बीच बातचीत।
  • लाभ: यह विभागों के बीच संघर्ष (Conflict) कम करता है और टीम वर्क को बढ़ाता है।

(C) विकर्ण संचार (Diagonal Communication)

जब संचार विभिन्न विभागों और विभिन्न स्तरों के लोगों के बीच होता है, बिना पदसोपान (Chain of Command) का पालन किए।

  • दिशा: आड़ी-तिरछी (Crosswise)।
  • उदाहरण: सेल्स डिपार्टमेंट का एक कनिष्ठ कर्मचारी (Junior Employee) सीधे प्रोडक्शन मैनेजर (Senior) से बात करे ताकि उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने का सुझाव दे सके।
  • लाभ: यह संचार की गति को बहुत तेज कर देता है और लालफीताशाही (Red Tapism) को कम करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis)

परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए तुलनात्मक तालिका बनाना बहुत प्रभावी होता है:

आधार (Basis)औपचारिक संचार (Formal)अनौपचारिक संचार (Informal)
उत्पत्ति (Origin)नियमों और नीतियों सेसामाजिक संबंधों से
प्रकृति (Nature)कठोर और संरचित (Rigid)लचीला और गतिशील (Flexible)
गति (Speed)धीमी (Slow)बहुत तेज (Very Fast)
साक्ष्य (Evidence)लिखित रिकॉर्ड होता हैकोई रिकॉर्ड नहीं होता
नाम (Alternate Name)आधिकारिक संचार (Official)अंगूरी लता (Grapevine)

निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्षतः, संचार के विविध प्रकार किसी संगठन के रक्त-प्रवाह (Blood stream) की तरह कार्य करते हैं। जहाँ औपचारिक संचार अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, वहीं अनौपचारिक संचार मानवीय संवेदनाओं और त्वरित सूचना प्रसार के लिए आवश्यक है। इसी प्रकार, शाब्दिक संचार सूचनाओं की सटीकता सुनिश्चित करता है, तो अशाब्दिक संचार भावनाओं और इरादों को व्यक्त करता है।

एक सफल प्रशासक या पेशेवर (Professional) वह है जो स्थिति की मांग के अनुसार इन सभी प्रकारों का संतुलित मिश्रण (Balanced Mix) उपयोग कर सके। उदाहरण के लिए, एक मैनेजर को नीतिगत घोषणा (Policy announcement) के लिए ‘लिखित और अधोमुखी’ संचार का प्रयोग करना चाहिए, लेकिन टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए ‘मौखिक और अनौपचारिक’ बातचीत का सहारा लेना चाहिए।

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Ravi Kumar is a content creator at Sarkari Diary, dedicated to providing clear and helpful study material for B.Ed students across India.

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